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Motilal Banarasidas Publishing House
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मुहूर्त चिन्तामणि भारतीय मुहूर्त शास्त्र की विशाल एवं जटिल परंपरा में एक आधारशिला ग्रंथ के रूप में स्थापित है। इसका श्रेय पूज्य दैवज्ञ श्री रामाचार्य को दिया जाता है। यह 16वीं सदी की यह मौलिक कृति अपने व्यापक और व्यावहारिक मार्गदर्शन के लिए 'शुभ क्षणों की कामना-पूर्ति करने वाला रत्न' कहलाती है। यह वैदिक ज्योतिष के सिद्धांतों को केवल ग्रहों की स्थिति से आगे बढ़ाकर, उन्हें व्यक्ति की जन्म कुंडली के साथ सूक्ष्मता से जोड़ती है। विवाह से लेकर यात्रा और व्यवसाय जैसे किसी भी महत्वपूर्ण जीवन कार्य को शुरू करने के लिए सबसे अनुकूल मुहूर्त का चयन करने का इसका विस्तृत विवेचन ही इसकी गहन महत्ता है, ताकि सर्वोच्च सफलता और समृद्धि के लिए ब्रह्मांडीय प्रभावों और मानवीय प्रयासों के बीच सामंजस्य सुनिश्चित किया जा सके।
Book Details:
Author: M. H. K. Shastri, Laxmi Kant Vashisth
Publisher: Motilal Banarsidass Publishing House
Edition: 1st
Publication Year: 2026
Pages: 761
Language: Hindi & Sanskrit
Size: 5.5" x 8.5"

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मुहूर्त चिन्तामणि भारतीय मुहूर्त शास्त्र की विशाल एवं जटिल परंपरा में एक आधारशिला ग्रंथ के रूप में स्थापित है। इसका श्रेय पूज्य दैवज्ञ श्री रामाचार्य को दिया जाता है। यह 16वीं सदी की यह मौलिक कृति अपने व्यापक और व्यावहारिक मार्गदर्शन के लिए 'शुभ क्षणों की कामना-पूर्ति करने वाला रत्न' कहलाती है। यह वैदिक ज्योतिष के सिद्धांतों को केवल ग्रहों की स्थिति से आगे बढ़ाकर, उन्हें व्यक्ति की जन्म कुंडली के साथ सूक्ष्मता से जोड़ती है। विवाह से लेकर यात्रा और व्यवसाय जैसे किसी भी महत्वपूर्ण जीवन कार्य को शुरू करने के लिए सबसे अनुकूल मुहूर्त का चयन करने का इसका विस्तृत विवेचन ही इसकी गहन महत्ता है, ताकि सर्वोच्च सफलता और समृद्धि के लिए ब्रह्मांडीय प्रभावों और मानवीय प्रयासों के बीच सामंजस्य सुनिश्चित किया जा सके।
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Author: M. H. K. Shastri, Laxmi Kant Vashisth
Publisher: Motilal Banarsidass Publishing House
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Publication Year: 2026
Pages: 761
Language: Hindi & Sanskrit
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