
विलक्षण महिलाओं से भेंट (Vilakshan Mahilaon Se Bhent)
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विलक्षण महिलाओं से भेंट (Vilakshan Mahilaon Se Bhent)
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Motilal Banarasidas Publishing House
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इस पुस्तक में सम्मिलित विश्व की अनेक विलक्षण महिलाओं ने लंबे समय तक इतिहासकारों और स्तंभ लेखकों का ध्यान आकृष्ट किया है। एलेनोर रूजवेल्ट, इंदिरा गाँधी, वांगारी मथाई, एडविना माउंटबेटन, हेलेन केलर, राजमाता विजया राजे सिन्धिया, राजकुमारी नीलोफर, सुषमा स्वराज तथा राष्ट्रपति बौपदी मुर्मु निश्चय ही इतिहास में उल्लेखनीय महिलाओं में शामिल हैं। डॉ कर्ण सिंह की निजी यावें, इन व्यक्तित्वों से जुड़ी स्मृतियाँ तथा उनके द्वारा उन पर छोड़ी गई छाप अधिक रोचक हैं। अलग-अलग स्थितियों में जाने पहचाने चेहरों का यह डॉ सिंह की स्मृतियों का लेखा जोखा, किरदारों को देखने का एक नया आयाम प्रस्तुत करता है। माउंटबेटन का श्रीनगर दौरा, संसद में इंदिरा गांधी के द्वारा ढाका के भारतीय सेना के अधीन होने की घोषणा, देश विभाजन के बाद महारानी तारा देवी की सक्रियता, भरतनाट्यम को पुनर्जीवित करने के लिए रुक्मिणी देवी अरुंडेल का गहन संघर्ष, एम एस शुभलक्ष्मी की संगीत क्षमता के संबंध में पं जवाहरलाल नेहरू की सकारात्मक टिप्पणियाँ, आदि इन विख्यात महिलाओं को एक अलग परिप्रेक्ष्य में रखते हैं।
डॉ सिंह की भेंट श्रीमती मुर्मु से राष्ट्रपति भवन के उसी कक्ष में हुई जहाँ 1950 से डॉ. राजेन्द्र प्रसाद से लेकर अन्य सभी राष्ट्रपतियों से जो 75 वर्षों में रहे हैं, उनकी भेंट हुआ करती थी। एक गरीब घर की आदिवासी समाज की महिला को राष्ट्रपति के रुप में वहाँ देखकर डॉ सिंह को स्पष्ट हुआ कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारतवर्ष में अद्भुत परिवर्तन आया है जो देश के सामाजिक विकास का प्रतिबिंब है। पुस्तक में चयनित महिलाओं के साथ उनका समय और उनसे जुड़ी घटनायें भी सजीव हो उठते हैं। एक समयान्तराल के बाद निरपेक्ष दृष्टि से देखने पर, ये व्यक्तित्व नई अर्थवत्ता प्राप्त करते हैं; वे अपनी कहानियाँ सुनाते हैं, और साथ ही हमें अपनी दुनिया के तनाव और तपिश से भी साक्षात्कार कराते हैं।
Book Details:
Author: Karan singh
Publisher: Motilal Banarsidass Publishing House
Edition: 1st
Publication Year: 2024
Pages: 173
Language: Hindi
Size: 7.25" x 9.5"

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इस पुस्तक में सम्मिलित विश्व की अनेक विलक्षण महिलाओं ने लंबे समय तक इतिहासकारों और स्तंभ लेखकों का ध्यान आकृष्ट किया है। एलेनोर रूजवेल्ट, इंदिरा गाँधी, वांगारी मथाई, एडविना माउंटबेटन, हेलेन केलर, राजमाता विजया राजे सिन्धिया, राजकुमारी नीलोफर, सुषमा स्वराज तथा राष्ट्रपति बौपदी मुर्मु निश्चय ही इतिहास में उल्लेखनीय महिलाओं में शामिल हैं। डॉ कर्ण सिंह की निजी यावें, इन व्यक्तित्वों से जुड़ी स्मृतियाँ तथा उनके द्वारा उन पर छोड़ी गई छाप अधिक रोचक हैं। अलग-अलग स्थितियों में जाने पहचाने चेहरों का यह डॉ सिंह की स्मृतियों का लेखा जोखा, किरदारों को देखने का एक नया आयाम प्रस्तुत करता है। माउंटबेटन का श्रीनगर दौरा, संसद में इंदिरा गांधी के द्वारा ढाका के भारतीय सेना के अधीन होने की घोषणा, देश विभाजन के बाद महारानी तारा देवी की सक्रियता, भरतनाट्यम को पुनर्जीवित करने के लिए रुक्मिणी देवी अरुंडेल का गहन संघर्ष, एम एस शुभलक्ष्मी की संगीत क्षमता के संबंध में पं जवाहरलाल नेहरू की सकारात्मक टिप्पणियाँ, आदि इन विख्यात महिलाओं को एक अलग परिप्रेक्ष्य में रखते हैं।
डॉ सिंह की भेंट श्रीमती मुर्मु से राष्ट्रपति भवन के उसी कक्ष में हुई जहाँ 1950 से डॉ. राजेन्द्र प्रसाद से लेकर अन्य सभी राष्ट्रपतियों से जो 75 वर्षों में रहे हैं, उनकी भेंट हुआ करती थी। एक गरीब घर की आदिवासी समाज की महिला को राष्ट्रपति के रुप में वहाँ देखकर डॉ सिंह को स्पष्ट हुआ कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारतवर्ष में अद्भुत परिवर्तन आया है जो देश के सामाजिक विकास का प्रतिबिंब है। पुस्तक में चयनित महिलाओं के साथ उनका समय और उनसे जुड़ी घटनायें भी सजीव हो उठते हैं। एक समयान्तराल के बाद निरपेक्ष दृष्टि से देखने पर, ये व्यक्तित्व नई अर्थवत्ता प्राप्त करते हैं; वे अपनी कहानियाँ सुनाते हैं, और साथ ही हमें अपनी दुनिया के तनाव और तपिश से भी साक्षात्कार कराते हैं।
Book Details:
Author: Karan singh
Publisher: Motilal Banarsidass Publishing House
Edition: 1st
Publication Year: 2024
Pages: 173
Language: Hindi
Size: 7.25" x 9.5"
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