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Motilal Banarasidas Publishing House
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चिंतन तभी सार्थक है- जब वह मन को शान्त करे तथा आपके जीवन को सार्थक बनाये। 'चेतना चिंतन' मनुष्य की अंतः चेतना को स्पर्श करने वाली एक गहन यात्रा है। हम सोचते हैं, महसूस करते हैं, निर्णय लेते हैं- किन्तु चेतना की वह अलौकिक शक्ति आती कहाँ से है- जो हमें हमसे हमारा परिचय कराती है। यह पुस्तक मन और मस्तिष्क के बीच की खाई को पाटती है। प्रस्तुत कृति अस्तित्वगत प्रश्नों पर गंभीर विचार विमर्श है। प्रस्तुत पुस्तक एक गुलदस्ता है जिसमें 16 विभिन्न खुश्बुओं एवं रंगो के आध्यात्मिक एवं सामाजिक लेख रूपी पुष्प गुंथे हुये है। पुस्तक में एक ओर जहाँ 'भक्त और भगवन्त', 'साधना के साधन', 'श्रवणभक्ति जैसे गूढ आध्यात्मिक लेख हैं, वहीं सरल भाषा में आप पायेंगे- गुरु गोरखनाथ के उपदेश और स्वाभिमानी द्रौपदी का परिचय। पाण्डवों के पुर्नजन्म के रूप में जन्में आल्हा उदल की संक्षिप्त गाथा भी है। पुस्तक में संकलित लेख लेखक के केवल विचार ही नहीं, अपितु अनुभूतियाँ हैं। पुस्तक केवल लेखों का संग्रह ही नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास और आध्यात्मिक उत्थान का एक सौम्य प्रयास है।
Book Details:
Author: Ashok Suri
Publisher: Motilal Banarsidass Publishing House
Edition: 1st
Publication Year: 2026
Pages: 171
Language: Hindi
Size: 4.75" x 7"

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चिंतन तभी सार्थक है- जब वह मन को शान्त करे तथा आपके जीवन को सार्थक बनाये। 'चेतना चिंतन' मनुष्य की अंतः चेतना को स्पर्श करने वाली एक गहन यात्रा है। हम सोचते हैं, महसूस करते हैं, निर्णय लेते हैं- किन्तु चेतना की वह अलौकिक शक्ति आती कहाँ से है- जो हमें हमसे हमारा परिचय कराती है। यह पुस्तक मन और मस्तिष्क के बीच की खाई को पाटती है। प्रस्तुत कृति अस्तित्वगत प्रश्नों पर गंभीर विचार विमर्श है। प्रस्तुत पुस्तक एक गुलदस्ता है जिसमें 16 विभिन्न खुश्बुओं एवं रंगो के आध्यात्मिक एवं सामाजिक लेख रूपी पुष्प गुंथे हुये है। पुस्तक में एक ओर जहाँ 'भक्त और भगवन्त', 'साधना के साधन', 'श्रवणभक्ति जैसे गूढ आध्यात्मिक लेख हैं, वहीं सरल भाषा में आप पायेंगे- गुरु गोरखनाथ के उपदेश और स्वाभिमानी द्रौपदी का परिचय। पाण्डवों के पुर्नजन्म के रूप में जन्में आल्हा उदल की संक्षिप्त गाथा भी है। पुस्तक में संकलित लेख लेखक के केवल विचार ही नहीं, अपितु अनुभूतियाँ हैं। पुस्तक केवल लेखों का संग्रह ही नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास और आध्यात्मिक उत्थान का एक सौम्य प्रयास है।
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Author: Ashok Suri
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